उत्तर प्रदेश में कितने जिले हैं

जमुई। चंद्रमंडी थाना अंतर्गत काकोरिया गांव में कोलियरी से रिटायर अपने पिता की रिटायरमेंट राशि को पाने के जुनून में बाधक बनी अपनी पत्नी, नाबालिग पुत्र समेत दो अन्य की गैंता से हत्या करने वाले उमेश यादव को फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम ने गुरुवार को हत्या की धारा 302 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 31 मई 2010 को घटित इस घटना के संदर्भ में संतोष कुमार यादव के बयान पर उमेश यादव समेत 5 लोगों पर हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले में पुलिस ने सिर्फ उमेश यादव के खिलाफ चार्जशीट दायर किया था। अपने बयान में संतोष यादव ने बताया था कि उसके पिता उदित यादव जब खेत की मापी करा कर घर लौट रहे थे तो उमेश यादव के घर के पास बचाओ बचाओ की आवाज सुनकर दौड़े तो देखा कि उमेश यादव अपनी पत्नी दुलारी देवी को गैंता से प्रहार कर रहा है। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। उमेश यादव ने जुनून में अपने 8 साल के बेटे रंजीत यादव को भी उसी गैंते से लहूलुहान कर मार डाला। उदित यादव जब दोनों को बचाने दौड़े तो उमेश यादव ने उन्हें भी गैंते के प्रहार से लहूलुहान कर जमीन पर गिरा दिया। जिससे उनकी भी मौत हो गई। वहीं उदित यादव को बचाने दौड़े उनकी पत्नी उर्मिला देवी को भी उमेश यादव ने गैंते से मार कर बुरी तरह जख्मी कर दिया जिसकी पीएमसीएच में इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके अलावा भी जो कोई इन सभी को बचाने आया उन्हें उमेश यादव ने गैंते से जख्मी कर दिया। इनमें मुकदमा दर्ज करने वाला संतोष यादव भी शामिल है। उमेश यादव अपने पिता मटरू यादव की कोलियरी से रिटायरमेंट पर मिली राशि को कब्जा करना चाहता था और सभी उसे इस राशि को लेकर पीने पिलाने में उड़ाने से रोक रहे थे। रुपये पाने के जुनून में उमेश यादव ने इस जघन्यतम हत्याकांड को अंजाम दिया और एक के बाद एक लगातार 8 वर्ष के बच्चे से लेकर उम्र दराज लोगों तक को मार डाला। इस मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम हरेंद्र कुमार सिंह ने उमेश यादव को हत्या की धारा में दोषी पाकर सजा सुनाई।