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मायावती ने आम्बेडकर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी दलित तथा वंचित वर्गों के लोगों को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए समर्पित कर दी. उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान बनाने का मौका मिलने पर आम्बेडकर ने इन वर्गों को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए कानूनी अधिकार दिये, मगर केंद्र और राज्य सरकारों की जातिवादी मानसिकता की वजह से उन्हें इन अधिकारों का पूरा लाभ नहीं मिल पाया. उन्होंने कहा कि आम्बेडकर ने यह भी कहा था कि अगर इन वर्गों के लोगों को भारतीय संविधान में मिले कानूनी अधिकारों का पूरा लाभ लेना है तो उन्हें संगठित होकर केंद्र और राज्यों में राजनीतिक सत्ता की चाबी अपने हाथों में लेनी होगी और इस बात का सबसे बड़ा साक्ष्य बीएसपी के नेतृत्व वाला चार बार का शासन काल है.