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जागरण संवााददाता, जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (संवर्ग) नियम,1954 के नियम छह में (संवर्ग अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति) में प्रस्तावित संशोधनों को रोके जाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधन हमारे संविधान की सहकारी संघवाद की भावना को प्रभावित करने वाले हैं। इससे केंद्र और राज्य सरकारों के लिए निर्धारित संवैधानिक क्षेत्राधिकार का उल्लंघन होगा। राज्य में पदस्थापित भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों में निर्भय होकर निष्ठापूर्वक काम करने की भावना में कमी आएगी। गहलोत ने पत्र में कहा कि इस संशोधन के बाद केंद्र सरकार संबंधित अधिकारी और राज्य सरकार की सहमति के बिना ही केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर बुला सकेगी। संशोधन के कारण संविधान द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति और जन कल्याण के काम करने के राज्य सरकार के प्रयासों को निश्चित तौर पर ठेस पहुंचेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा नियमों में संशोधन के संबंध में केंद्र सरकार ने 20 दिसंबर, 2021 को पत्र भेजकर राज्यों से सलाह मांगी गई थी। इस प्रस्ताव पर सलाह प्राप्त करने की प्रक्रिया के दौरान ही केंद्र सरकार द्वारा एक तरफा संशोधन प्रस्तावित कर 12 जनवरी, 2022 को दोबारा सलाह आमंत्रित कर ली है। उन्होंने कहा कि इस संशोधन से राज्यों को अधिकारियों की कमी का सामना करना पड़ेगा।