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[डॉ. मोनिका शर्मा]। पिछले कुछ अर्से से देश भर में दुष्कर्म से जुड़े समाचारों की बाढ़ सी आ गई है। हर उम्र की महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और बदसलूकी की दुष्प्रवृत्ति भी बढ़ रही है। ऐसे मामलों पर व्यापक बहस भी हो रही है। कानूनी प्रावधानों पर भी सोचा जा रहा है। फिर भी दिसंबर 2012 में दिल्ली में हुए निर्भया कांड के बाद सरकार के तमाम दावों और कानूनों में संशोधन के बावजूद तस्वीर ज्यादा नहीं बदली है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2016 के दौरान पूरे देश में दुष्कर्म के 38,497 मामले दर्ज किए गए। गौर करने वाली बात है कि यह आंकड़ा उन घटनाओं का है जो पुलिस तक पहुंचीं। सच तो यह है कि हमारे यहां अब भी लोक-लाज, सामाजिक-पारिवारिक दबाव और अभियुक्तों की दबंगई के चलते बहुत से मामले तो रिपोर्ट तक नहीं किए जाते। इससे भी शर्मनाक बात यह है कि दुष्कर्म के मामलों में अभियुक्तों को सजा मिलने का राष्ट्रीय औसत मात्र 28 फीसद है।