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जानकारी के अनुसार विगत शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज अस्पताल की जांच करने आई एमसीआइ की टीम ने मैटरनिटी वार्ड के ऑपरेशन थियेटर की स्थिति को देखकर उस पर सवाल खड़ा किया था। अब तक ओटी में स्पाइनल एनेस्थेसिया के माध्यम से ऑपरेशन किया जाता था लेकिन एमसीआइ की टीम ने स्पाइनल की जगह जेनरल एनेस्थेसिया का उपयोग करने की बात कही। जेनरल एनेस्थेसिया के उपयोग के लिए बॉयलर एपरेटस की जरूरत होती है। इसके बिना जेनरल एनेस्थेसिया विधि का उपयोग नहीं किया जा सकता है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव के पत्र के आलोक में उपायुक्त के मंतव्य से सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. कृष्ण कुमार के द्वारा पूर्व से पदस्थापित एनेस्थेटिक डॉक्टरों का पदस्थापन अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कर दिया गया है। वहीं मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पदस्थापित विभागाध्यक्ष सहित तीन एनेस्थेटिक डॉक्टरों में से डॉ. पीयूष सेंगर के बिना आवेदन के गैरहाजिर रहने की शिकायत विभागाध्यक्ष कर चुके हैं। ऐसे में सप्ताह के सातों दिन चौबीस घंटा एनेस्थेटिक की सेवा अस्पताल में उपलब्ध नहीं हो पाती है, जिससे ऑपरेशन कार्य में बाधा आती है।