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जागरण संवाददाता, पठानकोट : लोगों को एक छत के नीचे नागरिक सेवा मुहैया कराने के उद्देश्य से अगस्त 2016 में अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार ने सेवा केंद्र की शुरुआत की थी। पठानकोट में कुल 16 में से दो सेवा केंद्र अब बंद हो चुके हैं। आज हालात ये हैं कि सेवा केंद्र में मिलने वाली सेवाएं तो लगातार बढ़ाई जा रही हैं, जिस कारण यहां पर लोगों की भीड़ भी बढ़ती जा रही है, लेकिन कर्मचारियों की गिनती नहीं। सेवा केंद्र बंद होने के कारण ग्रामीण क्षेत्र से संबंधित लोगों को काम करवाने के लिए आना पड़ रहा है। इसके चलते लोगों को आर्थिक तौर के साथ-साथ समय की भी बर्बादी का सामना करना पड़ता है। शहर में कुल चार और ग्रामीण एरिया में दस सेवा केंद्र चल रहे हैं।