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हालांकि सीएम गहलोत का कहना है कि जादुगरी से वित्तीय प्रबंधन और केंद्र सरकार द्वारा तय की गई अतिरिक्त लोन सीमा का उपयोग किया जाएगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार पिछले साल में केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि में 14 हजार 94 लाख की कमी हुई है। केंद्र से मदद नहीं मिलने और चुनावी वादों को पूरा करने के बीच फंसी सरकार की पूरी अर्थव्यवस्था की उधार खाते से चल रही है। सरकार अब तक 40 हजार करोड़ का कर्ज ले चुकी। यह पिछले साल की तुलना में करीब 14 हजार करोड़ ज्यादा है। पिछले बजट में सरकार ने राजकोषीय घाटे का अनुमान 33,922 करोड़ रखा था। वह बढ़कर 40,190 करोड़ हो गया। अधिकारियों का मानना है कि वित्तीय वर्ष पूरा होने तक राजकोषीय घाटा 47 हजार 652 करोड़ 77 लाख पार हो जाएगा।