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जानकारों का मानना है कि इस प्रकार का नजारा तो सरकार द्वारा जबरन लगाए गए क‌र्फ्यू में भी देखने को नहीं मिलता जैसा कि इसमें था। लोग घरों में कैद, समस्त दुकानें पूरी तरह बंद, यहां तक कि लोगों को चाय-पान तक के लाले पड़ गए। दवा की दुकानें तो खुलीं मगर ग्राहक नदारद रहे। ऐसे में लोगों ने घरों में कैद रहने में ही भलाई समझी और किसी ने अपने परिवारजनों के साथ लूडो, शतरंज, कैरम, ताश आदि जैसे इनडोर गेम खेल कर समय बिताया। तो वहीं कई परिवार में साथ मिलकर खाना पकाने का एक अच्छा अवसर दिखा और लोगों ने पिकनिक का माहौल बना डाला। आम दिनों में पूरी तरह गुलजार नजर आने वाली सड़के एवं गलियां पूरी तरह सुनसान रहीं।