बकऱ्यच टक्कर

आखिर इतनी उत्कृष्ट चिकित्सा पद्धति होने के पश्चात भी इसका पतन क्यों हुआ? हमारे यहां संकट तब पैदा हुआ, जब तांत्रिकों, सिद्धों और पाखंडियों ने इनमें कर्मकांड से जीवन की समृद्धि का घालमेल शुरू कर दिया। इसके तत्काल बाद एक और बड़ा संकट तब आया, जब भारत पर यूनानियों, शकों, हूणों और मुसलमानों के हमलों का सिलसिला शुरू हो गया। इस संक्रमण काल में आयुर्विज्ञान की ज्योति नष्टप्राय हो गई। नए शोध व मौलिक ग्रंथों का सृजन थम गया। इन आक्रमणों के कारण जो अराजकता, हिंसा और अशांति फैली, उसके चलते अनेक आयुर्वेदिक ग्रंथ छिन्न-भिन्न हो गए। आयुर्विज्ञान की जो शाखाएं थीं, वे पंडे और पुजारियों के हवाले हो गईं, नतीजतन भेषज और जड़ी-बुटियों के स्थान पर तंत्र-मंत्र के प्रयोग होने लग गए।