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चतरा : पुलिस ने इसे मुठभेड़ बताया था लेकिन मामला पूरी तरह से फर्जी निकला और हाईकोर्ट ने इसकी जांच सीबीआइ को सौंप दिया। सीबीआइ में मामला गए हुए करीब दो वर्ष होने को है। वहीं पीड़ित परिवार न्याय की बाट जोह रहा है। पुलिस के हाथों मारे गए लोगों में भाकपा माओवादी के जोनल कमेटी के सदस्य देवराज यादव उर्फ अनुराग, उनका पुत्र संतोष यादव, भतीजा योगेश यादव और स्कार्पियो चालक एजाज अहमद भी शामिल थे। चालक एजाज अहमद प्रतापपुर थाना क्षेत्र नीमा गांव के थे। शेष तीनों मंझगांव के रहने वाले हैं। देवराज की पत्नी कौशल्या देवी कहती हैं, आर्थिक स्थिति बहुत बदतर हो गई है। गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में सेविका के पद पर कार्यरत हैं। उसके मानदेय से परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। सेविका पद से हटाने के लिए कुछ लोग षड़यंत्र रच रहे हैं। मृतक संतोष की पत्नी और कौशल्या देवी की बहु सोनी कुमारी कहती हैं कि उनके दो बच्चे हैं। इन बच्चों का भरण-पोषण सही ढंग से नहीं कर पा रही है। सोनी कहती है कि पति, ससुर और चचेरे देवर की हत्या के बाद से पूरा परिवार बिखर गया। घर की आर्थिक स्थिति बदतर हो गई। जब से मामले की जांच सीबीआइ कर रही है, तब से लेकर अब तक तीन बार पूछताछ हो चुकी है। घटना के पांच साल बाद भी न्याय नहीं मिला है। वह कहती है कि बकोरिया में पुलिस ने निहत्थों पर गोलियां बरसाई थी। मेरा घर और परिवार को उजाड़ने वालों का कभी भला नहीं होगा। देवराज यादव का भतीजा अखिलेश यादव कहते हैं कि भले ही घटना के पांच वर्ष बीत गए हो, लेकिन उन्हें ऐसा लगता है कि महीना-दो महीना पहले की ही बात है। 7 जून 2015 को संतोष यादव अपनी बहन सविता के लिए लड़का देखने के लिए सतबरवा गए थे। उसके साथ योगेश भी था। दोनों नीमा गांव के छोटू साई का स्कार्पियो भाड़ा पर ले गए थे। चालक के रूप में एजाज था। लड़का देखने के बाद चाचा देवराज भी उनके साथ हो गए थे। ये लोग घर आने वाले थे। लेकिन पुलिस ने ऐसा षडयंत्र रचा कि चारों का परिवार बर्बाद हो गया।