पटए क बैठक के एजेंडे

1967, 69 और 74 का चुनाव कल्याण सिंह ने जनसंघ से लड़ा था. आपातकाल के बाद 1977  में हुए चुनाव में वह जनता पार्टी के सिंबल पर मैदान में उतरे. इसके बाद भाजपा से विधायक रहे. 1999 में अनबन के बाद कल्याण सिंह भाजपा से अलग हो गए थे. इसके बाद उन्होंने एक पार्टी बनाई, जिसका नाम रखा राष्ट्रीय क्रांति पार्टी. इस दौरान तमाम सिपहसालार बाबूजी का साथ छोड़ गए, लेकिन अतरौली उनके साथ बनी रही. 2002 का चुनाव वह अपनी राष्ट्रीय क्रांति पार्टी से लड़े और बंपर वोटों से जीते. इसके बाद वह विधानसभा का चुनाव नहीं लड़े. अतरौली सीट बहू प्रेमलता को सौंप दी. 2007 में भाजपा के टिकट पर प्रेमलता अतरौली से विधायक चुनी गईं. इस बीच बेटे राजवीर सिंह के समायोजन को लेकर कल्याण सिंह की पार्टी से फिर अनबन हो गई.