न मक म ख य स र यल today

नौ विधानसभा क्षेत्र की समस्याएं और आकांक्षाएं कमोवेश एक सी हैं। शहरी क्षेत्र जाम, जलजमाव और अतिक्रमण से परेशान हैं तो गांवों में खेतों के पटवन और नल-जल और शौचालय को लेकर शिकायत है। मतदाताओं के बीच 'घोर' निराशा जैसा माहौल नहीं है। प्रधानमंत्री आवास योजना वाले घरों के मतदाताओं से लेकर व्यापारिक घरानों के वोटर तक यह तो मानते हैं कि बिहार में विकास ने रफ्तार पकड़ी है। यह भी सच है कि जन आकांक्षाओं का पहिया विकास की रफ्तार से तेज घूम रहा है। जिन घरों में नल पहुंचा वहां दिन-रात पानी नहीं पहुंचने की समस्या है, तो जिस घर में शौचालय बने वहां दूसरे भाई-बेटों के लिए शौचालय नहीं बनने की शिकायत। गांव तक सड़कें बनीं तो गुणवत्ता को लेकर नाराजगी है। स्कूल भवन बने तो शिक्षकों की कमी और गैरहाजिरी अब भी बरकरार है। बिजली सुधरी पर सिंचाई के लिए पर्याप्त संख्या में नलकूप नहीं होने से किसान नाराज हैं। समस्याएं, शिकायतें और नाराजगी के बावजूद मतदाताओं की न तो 'उम्मीदें' अभी अस्त हुई हैं, न ही 'मिजाज' को बदलने की कोई ठोस वजह बता रहे।