गदन कस संस्कर क मुख्य कर्म है

पूर्णिया। कनकई और महानंदा नदी की बालू पर होने वाली पैदावर ककड़ी, फूट, तरबूज, खीरा से यहां के किसानों के लिए साल भर की रोटी का जुगाड़ हो जाता है। जिसका यहा के सैकड़ों किसानों का साल भर इंतजार रहता है। तपती धूप में अपने को जलाकर किसान इस फसल को उगाते हैं। इस बार बालू पर उगने वाली ये फसलों ने इस बार किसानों की खुशहाली को बदहाली में धकेल दिया है। बैंक से कर्ज लेकर अधिकाश किसान कनकई और महानंदा नदी के किनारे इस फसल को उगाते हैं। कई किसानों ने मिलकर, डंगराहा धाट पुल के आस पास करीब सौ एकड़ में बैंक से कर्ज लेकर तरबूज का फसल लगायी थी। पौधे तो सही निकला पर इसकी लत्ती में फल की बिल्कुल नहीं निकले। जो भी फल लत्ती में थे वह भी पकने से पहले सूख गये। किसान मुजफ्फर, सुनील सहनी, अजहर, मोजीब, मतीन, जमाल आदि का कहना है कि उन लोगों ने बैंक से कर्ज लेकर फसल लगायी थी। फसल बर्बाद होने से जहां एक ओर किसानों की मेहनत बेकार चली गई वहीं दूसरी ओर बैंक के कर्ज में भी डूब गए। किसान अब बैंक का कर्ज कैसे चुकाएंगे। किसानों ने जिला पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी को खेतों में लगी फसल की जांच कराने और उचित सरकारी सहायता के लिए आवेदन पत्र सौंपा है।